ग्रंथसार
क्या बाहरी विजय का शोर अंतर्मन के मौन को मिटा सकता है, या असली संग्राम भीतर ही कहीं लड़ा जाता है?
शान्तिपर्व · अध्याय 166
आत्म-संयम का फल