ग्रंथसार
आश्रम के शांत वातावरण में जब सूतजी ने न्यायपूर्ण शासन की चर्चा छेड़ी, तो देवरात के मन के सारे द्वंद्व जैसे एक-एक कर मिटने लगे।
शान्तिपर्व · अध्याय 17
न्यायपूर्ण शासन का स्वरूप