ग्रंथसार
अहिंसा की पराकाष्ठा केवल शस्त्र त्यागना नहीं, बल्कि उस आत्मिक शांति को प्राप्त करना है जहाँ बैर का भाव ही शेष न रहे।
शान्तिपर्व · अध्याय 170
अहिंसा का महत्त्व