ग्रंथसार
क्या क्रोध का अग्नि-दाह वास्तव में बुझाया जा सकता है, या यह मनुष्य के भीतर ही सदा धधकता रहेगा?
शान्तिपर्व · अध्याय 175
क्रोध पर विजय