ग्रंथसार
कर्मों के जाल को समझना ही संसार की सबसे बड़ी पहेली है, जिसे सुलझाने के लिए सूतजी ने देवरात को एक नई दृष्टि प्रदान की।
शान्तिपर्व · अध्याय 178
कर्मफल का रहस्य