ग्रंथसार
नयी सत्ता के भार से दबे धर्मराज युधिष्ठिर को पितामह भीष्म ने जो राजधर्म का मर्म समझाया था, वही आज भी शासन का श्रेष्ठतम आधार है।
शान्तिपर्व · अध्याय 186
राजधर्म का स्वरूप