ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि एक राजा का वास्तविक ऐश्वर्य उसके खजाने की स्वर्ण मुद्राएं नहीं, बल्कि उसके दरबार में बैठे विद्वानों की मेधा होती है?
शान्तिपर्व · अध्याय 195
विद्वानों का सम्मान और राजधर्म