ग्रंथसार
क्या बाहरी विजय के शोर में हम अपने भीतर मौन हुए उस सत्य को सुन पा रहे हैं, जिसे कुरुक्षेत्र की रणभूमि में पितामह भीष्म ने धर्मराज युधिष्ठिर को समझाया था?
शान्तिपर्व · अध्याय 196
आत्म-नियंत्रण का मार्ग