ग्रंथसार
काल के प्रवाह में बहते हुए हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि हमारे हाथों में केवल कर्म की लगाम है, परिणाम की नहीं।
शान्तिपर्व · अध्याय 198
काल और भाग्य की महिमा