ग्रंथसार
सत्य के प्रकाश में ही जीवन के समस्त अंधकार विलीन हो जाते हैं, आइए जानें पितामह भीष्म और धर्मराज युधिष्ठिर के उस दुर्लभ संवाद की गाथा।
शान्तिपर्व · अध्याय 202
सत्य की महिमा