ग्रंथसार
क्या अकर्मण्यता ही वास्तव में शांति का मार्ग है, या यह कर्तव्य से पलायन का एक सूक्ष्म मोह है?
शान्तिपर्व · अध्याय 21
अकर्मण्यता का दोष