ग्रंथसार
मृत्यु शैया पर लेटे भीष्म पितामह के अंतिम उपदेशों में नश्वर जीवन का वह सत्य छिपा है, जिसे जानकर मनुष्य का अहंकार गल जाता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 210
जीवन की क्षणभंगुरता