ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि जब मन और बुद्धि के बीच युद्ध छिड़ता है, तब जीवन की लगाम किसके हाथ में होनी चाहिए?
शान्तिपर्व · अध्याय 224
मन और बुद्धि का स्वरूप