ग्रंथसार
ज्ञान का अर्थ केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के उस अखंड प्रकाश का साक्षात्कार है जो अंधकार को सदा के लिए मिटा देता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 227
ज्ञान का मार्ग