ग्रंथसार
क्या इंद्रियों की लगाम को थामना ही वास्तव में साम्राज्य की नींव है, यह जानने के लिए सूतजी के मुख से भीष्म पितामह का यह उपदेश सुनते हैं।
शान्तिपर्व · अध्याय 232
आत्म-संयम का मार्ग