ग्रंथसार
क्या प्रारब्ध की बेड़ियाँ इतनी कठोर हैं कि मनुष्य उनसे कभी मुक्त नहीं हो सकता, या फिर हमारे कर्मों का लेखा-जोखा ही हमारा भाग्य निर्धारित करता है?
शान्तिपर्व · अध्याय 233
शुभ और अशुभ कर्मों का फल