ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुआ, तब सूतजी ने इन्द्रिय-विजय के उस गूढ़ रहस्य को खोला जो राजा को चक्रवर्ती बनाता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 239
इन्द्रिय संयम का महत्व