ग्रंथसार
मृत्यु के शीतल स्पर्श के सम्मुख खड़ा होकर भी जो व्यक्ति निडर रह सके, वही वास्तव में जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ पाया है।
शान्तिपर्व · अध्याय 240
मुक्ति का मार्ग