ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि जिस मन पर हमारा नियंत्रण नहीं, वह हमें सुख की ओर ले जा रहा है या अंतहीन दुखों की खाई में?
शान्तिपर्व · अध्याय 250
मन और बुद्धि का स्वरूप