ग्रंथसार
क्या कर्म का चक्र ही मनुष्य के भाग्य की डोर है, या फिर ज्ञान का प्रकाश उस डोर को काटकर मुक्त कर सकता है?
शान्तिपर्व · अध्याय 253
कर्म और ज्ञान का फल