ग्रंथसार
क्या मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु भी हो सकता है, यह जानने के लिए सूतजी के मुख से भीष्म पितामह के उपदेशों की यह कथा सुनिए।
शान्तिपर्व · अध्याय 256
आत्म-नियंत्रण का मार्ग