ग्रंथसार
नदी के तट पर संध्या की बेला में बैठे सूतजी ने जब देवरात को जीवन की उलझनों से मुक्त होने का सूत्र समझाया, तो वातावरण में एक अद्भुत शांति छा गई।
शान्तिपर्व · अध्याय 261
आसक्ति का संकट