ग्रंथसार
समय की धारा में बहते हुए हम यह भूल जाते हैं कि तट पर खड़े होकर इसे देखने वाला साक्षी भाव ही हमें काल के चक्र से मुक्त कर सकता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 263
काल का चक्र