ग्रंथसार
क्या हमारे आज के कृत्य ही हमारे कल का भाग्य रचते हैं, या फिर यह जीवन किसी अदृश्य सूत्र से बंधा है?
शान्तिपर्व · अध्याय 265
कर्मों का फल