ग्रंथसार
काल के प्रवाह में बहते इस संसार की नश्वरता को समझना ही जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान है, आइए भीष्म पितामह और महाराज युधिष्ठिर के संवाद से इसे आत्मसात करें।
शान्तिपर्व · अध्याय 268
संसार की अनित्यता