ग्रंथसार
सूतजी की अमृतमयी वाणी से आज धर्म के उस सूक्ष्म सत्य का उद्घाटन होगा, जिसे जानकर युधिष्ठिर का संशय सदा के लिए मिट गया था।
शान्तिपर्व · अध्याय 277
धर्म का स्वरूप