ग्रंथसार
मौन के महासागर में ही ज्ञान की वह दिव्य धारा बहती है, जो एक साधारण मनुष्य को युगपुरुष के पद पर प्रतिष्ठित कर देती है।
शान्तिपर्व · अध्याय 284
मौन का महत्त्व