ग्रंथसार
मित्रता का धागा हमारे चरित्र की दिशा निर्धारित करता है, इसलिए जीवन में संगति का चुनाव अत्यंत विचारपूर्वक करना चाहिए।
शान्तिपर्व · अध्याय 286
सत्संगति और मित्रता का महत्त्व