ग्रंथसार
कर्म की अदृश्य डोर से बंधा है संसार का हर जीव, जिसे सूतजी के मुखारविंद से समझना एक परम सौभाग्य है।
शान्तिपर्व · अध्याय 290
कर्म-फल का सिद्धांत