ग्रंथसार
क्या जीवन से विरक्त होकर वनों में जाना ही त्याग है, या संसार में रहकर भी उससे मुक्त हुआ जा सकता है?
शान्तिपर्व · अध्याय 292
त्याग का महत्त्व