ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मन पर हम अपना अधिकार समझते हैं, वही वास्तव में हमारा सबसे बड़ा मित्र है या शत्रु?
शान्तिपर्व · अध्याय 297
मन और बुद्धि का स्वरूप