ग्रंथसार
क्या धर्म की रक्षा हेतु कठोर होना अधर्म है, या फिर राजधर्म के पालन में यही सबसे बड़ी धर्मपरायणता है?
शान्तिपर्व · अध्याय 30
दण्ड-नीति की आवश्यकता