ग्रंथसार
सत्ता के शिखर पर बैठकर भी वैराग्य की अग्नि में तपना कैसे संभव है, यही आज की जिज्ञासा का मूल है।
शान्तिपर्व · अध्याय 301
विद्वान राजा का आचरण