ग्रंथसार
गुरुवर सूतजी के मुख से भीष्म पितामह के उपदेशों को सुनकर कुरुक्षेत्र के युद्ध का अर्थ आज भी हृदय में एक नई चेतना जगा देता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 307
प्रजा और राज्य के प्रति कर्तव्य