ग्रंथसार
क्या राजकाज का भार और आत्मिक शांति का मार्ग एक साथ चल सकते हैं? आइए, इस गूढ़ रहस्य को सूतजी महाराज की अमृतवाणी से जानते हैं।
शान्तिपर्व · अध्याय 309
कर्म और ज्ञान का फल