ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि से उपजे उन महान राजधर्मों को सुनकर आज भी मन में कर्तव्य का बोध जागृत हो उठता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 31
एक प्रबुद्ध राजा के गुण