ग्रंथसार
क्या महलों की चकाचौंध में रहकर भी कोई आत्मा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, यह प्रश्न आज भी जिज्ञासुओं के मन में कौतूहल जगाता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 32
त्याग और राजधर्म