ग्रंथसार
समय की धारा में बहते हुए जीवन के रहस्यों को समझने की जिज्ञासा ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है।
शान्तिपर्व · अध्याय 321
काल और नियति का स्वरूप