ग्रंथसार
समय की गति के चक्र में जब धर्म और कर्म के प्रश्न उलझने लगते हैं, तब आचार्य का मार्गदर्शन ही एकमात्र प्रकाश स्तंभ होता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 326
काल का धर्म पर प्रभाव