ग्रंथसार
क्या दिव्य दृष्टि केवल नेत्रों का विषय है, या यह अंतःकरण की वह चैतन्यता है जो नश्वर संसार के परे परमात्मा का साक्षात कराती है?
शान्तिपर्व · अध्याय 329
दिव्य दृष्टि का स्वरूप