ग्रंथसार
काल की अनंत धारा में बहते हुए हम सब केवल एक निमित्त मात्र हैं, इसे समझना ही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।
शान्तिपर्व · अध्याय 33
काल और नियति का स्वरूप