ग्रंथसार
क्या कर्म के बंधन से मुक्त होकर भी राजधर्म का निर्वहन संभव है? आइए, सूतजी के मुख से भीष्म पितामह के उस कालजयी उपदेश को सुनें।
शान्तिपर्व · अध्याय 331
सदाचारी कर्म का फल