ग्रंथसार
क्या बाहरी शत्रुओं को परास्त करना ही विजय है, या कहीं भीतर छिपे किसी और युद्ध को जीतना शेष है?
शान्तिपर्व · अध्याय 335
इंद्रिय संयम की शिक्षा