ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुआ, तब देवरात के मन में उठे जिज्ञासा के ज्वार ने सूतजी के मुख से ज्ञान की सरिता प्रवाहित कर दी।
शान्तिपर्व · अध्याय 34
अज्ञान का मूल कारण