ग्रंथसार
नारायण की महिमा का वह अमृत प्रवाह, जिसने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भी परम शांति का मार्ग प्रशस्त किया था।
शान्तिपर्व · अध्याय 340
नारायण महिमा का वर्णन