ग्रंथसार
क्या ईश्वर की कृपा केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित है या वह हर जीव के लिए द्वार खोलकर रखती है?
शान्तिपर्व · अध्याय 345
दैवी कृपा का स्वरूप