ग्रंथसार
शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह के मुख से निकले वे अंतिम शब्द आज भी धर्म और न्याय की ज्योति बनकर मार्ग प्रशस्त करते हैं।
शान्तिपर्व · अध्याय 347
भीष्म के अंतिम उपदेश