ग्रंथसार
नारायण की वह अनंत महिमा, जो कुरुक्षेत्र के शरशैया पर लेटे भीष्म पितामह ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी, वही आज हमारे सत्संग का आधार है।
शान्तिपर्व · अध्याय 348
नारायण महिमा