ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुए, तो सूतजी के मुख से निकले ज्ञान के शब्दों ने देवरात के हृदय में एक नई चेतना जगा दी।
शान्तिपर्व · अध्याय 349
दैवी ज्ञान का स्वरूप