ग्रंथसार
क्या बाहरी संसार की विजय ही वास्तविक विजय है, अथवा मन के भीतर छिपे दुर्ग को जीतना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है?
शान्तिपर्व · अध्याय 36
मन का निग्रह